*बूढ़ी आंखो का इंतजार*
टूटी हुई झोपड़ी में वो रहती थी
एक लंबा अरसा हो गया उसे कोई मिलने को ना आया था
वो रोज वही इंतजार करती उनके आने का
सालो का इंतजार पर कोई नहीं लेने आया था
कहा उनसे की चलो हमारे साथ
वो बोली बेटा बोल के गया था कुछ दिन में लेने आता हूं

सालो गुजर गए इस बात को
वो बूढ़ी आखें अंकित आज भी उनके इंतजार में
हम दोनो ही जानते थे
जो चला गया वो अब लौट के नही आने वाला था
नही आने वाला था
– अंकित सेंगर
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