Title ~ चरित्रहीन प्रेम
दुनिया का सबसे बड़ा तोफा
मैने अपनी ईमानदारी दीजिंदगी भर साथ दूगा
हर बात की जवाबदारी ली
जिंदगी भर साथ दूगा
हर बात की जवाबदारी ली
मेरी मोहोबत जो उसे
अपनी पत्नी समझ बताया सब

उसने राह चलते
मेरी चरित्र की नीलामी की
आखिर में
मेरी वफा ही मेरी सजा बन गई
जीवन में मानो
प्रेम की ऋतु पतझड़ में बदल गई

अंततः बस
मैं अब वियोग रस में बैठा हूं
अंकित क्या करू
अग्नि को साक्षी माना था इस प्रेम का
अब अपनी आत्मा में
जलता रहता हूं
अंकित सेंगर (#kavyakahani)

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