चरित्रहीन प्रेम

Title ~ चरित्रहीन प्रेम

दुनिया का सबसे बड़ा तोफा
मैने अपनी ईमानदारी दीजिंदगी भर साथ दूगा
हर बात की जवाबदारी ली

जिंदगी भर साथ दूगा
हर बात की जवाबदारी ली

मेरी मोहोबत जो उसे
अपनी पत्नी समझ बताया सब

उसने राह चलते
मेरी चरित्र की नीलामी की

आखिर में
मेरी वफा ही मेरी सजा बन गई

जीवन में मानो
प्रेम की ऋतु पतझड़ में बदल गई

अंततः बस
मैं अब वियोग रस में बैठा हूं

अंकित क्या करू
अग्नि को साक्षी माना था इस प्रेम का

अब अपनी आत्मा में
जलता रहता हूं

अंकित सेंगर (#kavyakahani)

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Pati patni नोक झोंक 😂😍

हां, सुन रहे हो ना ?

सुन ही तो रहा हूं , काश समय रहता सुन लेता..

क्या सुन लेते , बताना जरा…, कुछ नही !
नही कुछ तो कहा है तुमने..,

बताते हो, या मां से शिकायत करू …



अब क्या किया पगली ?, मां देखो फिर से परेशान कर रहे है…

(बाहों में भरते हुए ) मान भी जा ना , सिर्फ तभी जब साड़ी के लिए “हां” कहोगे



अच्छा ठीक है ,पगली
( इसी के साथ दोनो हस पड़े)

अंकित सेंगर
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औरों के लिए मृत्यु, मेरे लिए जिंदगी रही

औरों के लिए मृत्यु, मेरे लिए जिंदगी रही

एक अरसे पहले छूट गई थी उसके जाने से मेरी खुशी
आग सिमटी थी मेरे सीने में और मेरी मुस्कान खो गई

जिंदगी की वो मेरी आखरी ख्वाइश थी
ना जाने किसकी नजर लगी और वो खो गई

मेरा शिथिल पड़ा चेहरा मानो बर्फ सा जम गया
अंकित होती थी भावनाए कभी, आज धड़कन थम गई



लम्हे आज भी याद मुझे संग उसके
मैं बस जिंदा था पर जिंदगी संग उसकी थी

बस सफर खत्म सा होने को जिंदगी का
मैं आग सा गर्म वो बर्फ सी ठंडी थी

मैं बस जल रहा था अंतहीन आग में आने से पहले उसके
पर तेरे प्यार की ठंडक ने मुझे जिंदगी दी


बस कुछ पल और जिंदगी के सांसे रुक सी रही
इंतज़ार खत्म होने को जिंदगी का

औरों के लिए ये मौत है पर मेरे लिए
तुझसे मिलने की ख्वाइश ही मेरी जिंदगी रही

मेरी जिंदगी रही


अंकित सेंगर
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पहला मिलन

वो मौसम तुम्हे याद है
जब हम पहली बार मिले थे

बर्फ सी ठंडी हवा चल रही थी
उस मोड़ पर हम दोनो अकेले थे



हम रोज एक दूसरे से मिलते थे
पर आज का ये मिलन अलग था

बर्फ सी शर्द रात थी
पर ना जाने क्यों तेरे गले लगते ही

मानो श्वासो में अग्न लगी
तप रहा पूरा बदन था



सालो बीत गए उस रात को
पर उस रात को अंकित कर हो जाता मैं मगन था

वो मौसम तुम्हे याद है
जब हुआ हमारा पहला मिलन था ।

– अंकित सेंगर
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बारिश और चाय 🌧️

बारीश की सुरसुराहट है
संग ये भीनी भीनी बारिश

काफी वक्त से इंतजार है उसका
पर वो भी बारिश की वजह से, घर से नहीं निकल पा रही

मैं भीग चुका हूं काफी हद तक
अब मुझे वो बारिश याद आ रही

जब हम अजनबी थे और मिले पहली बार एक नुकड पे
ऐसी ही बारिश उस दिन भी थी और ठंड बढ़ती जा रही

हम दोनो ही भीगे थे पूरी तरह
अब तो हाथ भी ठंडे होते जा रहे

वो कांप रही थी ठंड से, मुझ से और देखा न गया
कुछ दूर एक चाय के नुक्कड़ से मैं भीगते हुए चाय ले आया

उसने पहले तो मना किया पर
पर फिर कापते हाथों से उसे ग्लास थमा दिया

ये पहली डेट हमारी
आज भी मेरा मन खिलखिला देती है

बारिश कुछ कम हुई
अंकित ही ना हुआ की कब वो आ के मुझे निहारने लगी

उसे एकाएक देख मैं मुस्कुरा गया
और वो भी शरमाते हुए मेरे गले  लगा गई

अब उसने एक ग्लास में चाय डाली
और मेरे हाथ ग्लास थामा दिया

मैं मुस्कराने लगा ये देख
“बीवी हूं तुम्हारी” ये बोल उसने भी मुस्कुरा दिया

– अंकित सेंगर (#kavyakahani
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