*मोटी हूं क्या ! 😠*
खुले आसमान के नीचे छत पे पड़ा हूं
थोड़ा गुमसुम सा हूं थोड़ा हस रहा हूं
यादें पुरानी ताजा हो रही
पहले मैं ज्ञान देता था, आजकल उसका सुन रहा हूं

तभी जोश जगा पुराना वाला
नहीं सुनूगा उसका ताना बाना
प्रतिज्ञा ली ही थी की धुआं छुट गया
नीचे से एक आवाज आई और दिल टूट गया
अभी तो अंकित हुआ ही था बुलंदी पे झंडा मेरा
बीबी की एक आवाज पर सारा जोश हुआ ठंडा मेरा
अंततः हम भीष्म प्रतिज्ञा से बाहर निकल गए
जी तो कर रहा लगा दे मिला के, पर हम बाल सहला के संभल गए

वो पूछ रही थी बार बार “मोटी हो गई हूं क्या ?“
“अरे बिकुल नही तुम तो आज भी 16 साल की कमसन काली हो” ऐसे कह प्राण संभल गए
मेरे इस पाप को देख यमदूत भी हस गया
बोला सही किया तूने, की थी सच कह मैने गलती
तभी तो मैं यमदूत बन गया ।
–अंकित सेंगर (#kavyakahani )
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