I can do , I can’t …… I repeated it again again that’s my first BLIND DATE. My parents arrange it for my life partner . First time I Feel shy , actually I shy very much. I don’t know why I blushed. But it happens
She came and sit Infront of me. We both feel little bit shy . I don’t told her after our meeting , I wish next time I told her . For me it’s love at first sight
–Ankit Sengar #kavyakahani
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As always they are going to sleep Everyone says today’s festival “rainof wealth”. Her mother told her about that as always they don’t have enough food As always they sleep with half stomach
And kiddo wishes today they got enough money because she’s not getting enough food from a long time
How sad???
-Ankit Sengar #kavyakahani
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वो मां नहीं बन सकती ये तोफा कुदरत ने उससे छीन लिया वो समझ नहीं पा रही क्या थी गलती वक़्त ने जिसका ऐसा हिसाब लिया उसकी आंखो में आंसू शायद वो अपने अनजाने पापो कि प्रकृति से क्षमा मांग रही
वो दिल से रो रही अपनी गलतियों पे पछता रही फिर एक तोफा मिला उसे उसे एक ऐसी जरूरतमंद नाराज़ थी जिंदगी उससे वो अपनी कोख में चंद पैसों के लिए उसका बच्चा पालने को मान गई
वो भी एक गरीब मां थी जिसका बच्चा एक वक़्त के खाने को रो रहा उसके लिए वो उस मृत्यु समान प्रसव पीड़ा के लिए भी मान गई नौ माह तक संभाला उस नन्ही जान को आज वो आया तो जाने का वक़्त हो गया भले ही उसने किराया लिया पर उस बच्चे से उसे भी प्यार हो गया
नहीं देना चाहती थी वो अपनी नन्ही सी जान को पर वो वक़्त से मजबूर थी पहले बच्चे की दो वक़्त की रोटी मुश्किल से मिली उसे वो कैसे अपने दूसरे बच्चे से उसकी किस्मत छीन ले दुआए दे लगा सीने से उसने उस नन्ही जान को उसने उस निसंतान दंप्पती को सौंप दिया
अपनी कोख बेच अपनी एक औलाद बड़ी की दूसरी दे एक अधूरी स्त्री को मां बना उसे भी पूरा किया अंकित क्या करू इस प्रेम को जीवन का रंग कहीं गहरा कहीं हल्का लगा ” किराए की कोख “ लगता सुनने में कितना बुरा पर उसने एक बंजर भूमि को मां बना लहलहाना सीखा दिया
–अंकित सेंगर #kavyakahani
World first surrogate mother
1985–1986 – A woman carried the first successful gestational surrogate pregnancy. 1986 – Melissa Stern, otherwise known as “Baby M,” was born in the U.S. The surrogate and biological mother, Mary Beth Whitehead, refused to give up custody of Melissa to the couple with whom she made the surrogacy agreement.
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( यह वार्तालाप दो दोस्तों के बीच हैं जो ज़िन्दगी को सही मायनों में समझने का प्रयास कर रहे हैं। )
आनंद:- तुम अपनी ज़िन्दगी में इतना परेशान हो, तुम्हारे माता-पिता का देहांत हो चुका हैं, तुम्हारी बहन की शादी बाकी हैं, तुम्हारी पढ़ाई बाकी हैं और अभी तो ज़िन्दगी में काफ़ी कुछ देखना बाकी हैं लेकिन फिर भी तुम हमेशा मुस्कुराते रहते हो। इतनी परेशानियों के बावजूद तुम कैसे मुस्कुरा लेते हो?
दर्शन:- ज़िन्दगी में उतार-चढ़ाव तो आते ही रहते हैं। कभी खुशी कभी गम मगर हर समय एक जैसा नहीं होता हैं ना दोस्त। कड़ी मेहनत और लगन से इंसान पर्वत लांग जाता हैं तो फिर ज़िन्दगी की मुश्किलों का सामना करना तो और भी बहुत आसान हैं।
आनंद:- फिर भी तुम अकेले कमाने वाले इस घर में और तुम्हारी बहन की भी शादी बाकी हैं तुम्हारा पूरा जीवन बाकी हैं ऐसे में तुम अपना जीवन व्यतीत कैसे करोगे और क्या क्या करोगे?
दर्शन:- जिम्मेदारियाँ तो हर किसी को निभानी होती हैं। कभी जल्दी तो कभी उपयुक्त समय पर, पर निभानी तो सभी को होती हैं ना। तो फिर जिम्मेदारियों को बोझ समझने से वह नहीं निभेंगी परंतु यदि तुम उन्हें अपने जीवन का अभिन्न अंग मानकर चलो तो वह सहजता से निभाई जा सकती हैं।
आनंद:- अच्छा जब तुम्हारी बहन शादी करके चली जाएगी उसके बाद तुम क्या करोगे? उसके बाद तुम अकेले महसूस नहीं करोगे खुद को?
दर्शन:- बहने तो दूसरे घर की अमानत ही होती हैं। उन्हें तो दूसरे घर जाकर अपना नया संसार बसाना होता हैं। और सभी बहने और लड़कियाँ तो दो कुलों को त्यारती हैं, एक अपने बाबुल को (पिता के अंगना को) और दूजा अपने ससुराल को जहां पर वह नए रिश्ते बना कर अपना बाकी का जीवन व्यतीत करती हैं।
आनंद:- अच्छा, अब मैं समझा तुम इतनी समझदारी कहाँ से लाते हो। उम्र और जिम्मेदारी इंसान को सब कुछ समझा ही देती हैं।
सीख:- ज़िन्दगी में चाहे कितनी भी तकलीफ़ या परेशानियाँ हो, आपको उसका डटकर सामना करना चाहिए और अपनी जिम्मेदारियों से मुंह नहीं मोड़ना चाहिए। उन्हें पूरे मन से निभाने का प्रयास करना चाहिए। इसी से आप एक सुगढ़ और सुकून भरी ज़िंदगी जी पाएँगे।
दिपशीखा अग्रवाल
Collab with Ankit Sengar #kavyakahani
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