
मैं जन्मा अनंतकाल की पीड़ा ले
मैं जन्मा अनंतकाल की पीड़ा ले
मैं जन्मा
पीड़ा कहूं या त्याग इसे
मैं तो बस अंनत काल की पीड़ा को ही जन्मा
वो सब चले गए धीरे धीरे
पर अब भी यही हूं मैं
क्या अंकित करु
अनंतकाल तक सिर्फ जलना
और हर पल मरना मुझे
क्योंकि ठगने वाला ही तो था अपना
पर फर्क नहीं
मुझे इसी रंग मैं ही रंगना
अपनी आत्मा के
खून से रंगना मुझे
यही मेरी जिंदगी का नगमा
अनंतकाल तक सिर्फ जलना मुझे
अंत काल तक सिर्फ जलना
–अंकित सेंगर
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