
“रिश्ते वाले”
जिस तरह लड़की डरती
वैसे लडको को भी कुछ डर सा लगता है
जब रिश्ते की बात आती
लड़कियों की तरह लडको का भी दिल
जोर से धड़कता है
समाज की नजर में हम बहुत मजबूत है
पर ना जाने क्यों
ऐसे वक़्त पर सब भूला भूला सा लगता है

ऐसी ही एक कहानी शुरु हुई
जब वो घर आयी
और घरवालों के साथ बात हुई
मेरी नज़रे इंतजार कर रही थी उसका
पर ना जाने उसके आने से पहले ही
मेरी धकन, ना जाने क्यों इतनी अशांत हुई
वो अपने रिश्तेदारों के साथ हमारे घर आयी
ना जाने कैसी ये अनुभूति
मेरी तो नज़रे ही अवाक हो गई

ना कभी ऐसा हुआ था साथ मेरे
पर उसके आते ही
हर बात मेरी हवा के साथ हो गई
जैसे तैसे हिम्मत कर आया मै
बैठे हम एक दूसरे के सामने
हम दोनों ही नज़रे चुरा रहे
ना जाने क्यों जागे ऐसे एहसास है

इस पूरे वक़्त मै हम ने सीधे कुछ बात ना की
हर बात की परिवार के साथ में
नज़रे चुरा अब भी हम एक दूसरे को देख रहे
चुप है पर लग रहा
जैसे खड़े हो फूलों की बरसात में
आखिर ये घर वालो की बात ख़त्म हुई
समझ ही ना आया कैसे पूछू
क्या कहीं और चल बात करे साथ में

हाय ये शर्म क्या अंकित करू मै
वो चली गई
उम्मीद है अगली बार जब मिलूगा
बता ही दूगा
मुझे हुआ उससे पहली नजर में प्यार है
–अंकित सेंगर
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