

समझना तो है नही तुमने
समझना तो है नही तुमने
वो कह रूठ जाती
उसे ऐसे सताने का
अलग ही आनंद है
अंकित क्या करू उसे
उसे यूं मनाने का
उसके मूंह फूलने का
अंदाज ही अलग है
मेरे टूटने पर मुझे
संभालने की उसकी
कोशिश ही अलग है
प्रेम का रंग बड़ा विचित्र
पर इसमें रंगने का
आनंद ही अलग है
–अंकित सेंगर
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