
*एक जिंदा लाश मैं*
एक लंबा अरसा हो गया
तुझे जो दिल में छुपाए हुए
तेरी यादें, जो अब तक मैं जी रहा
कभी आखें नम, तो कभी मुस्कुराया करता हूं
मुस्कुराता हूं, क्योंकि अब भी तू याद है मुझे
मुरझाया हूं, क्योंकि अब नही , तू साथ मेरे
याद अब भी आती तेरी
अब भी जागा करता हर रात हूं
अंकित करना चाहता था तुझे
शायद , तेरे झूठे प्यार को
इतने बरस लग गए
तेरी याद मैं मैने खुद को
तड़प की उसी आग में झोंक दिया
जलता रहा हूं सालो तक
क्यूं नही तूने एक बार भी मेरा हाल पूछ लिया
काश पूछती तो बता देता
मेरे दिल का क्या हाल है
तेरे किसी और को चुनने ने
मुझे रुलाया हर बार है
हर बार तेरे उन बिना नाम वाले दोस्तो की
तुझ से वो करीबिया मुझे सताती, अब भी हर रात है
आखिर में तूने किसी और को
मेरी जगह चुन लिया
झूठे तेरे वादे थे
आखिर क्यों, तूने प्यार का ऐसा सिलाह दिया
हार गई मेरी बरसो की महोबत्त
तूने जीते जी मुझे मुर्दा बना दिया
जीते जी बस
एक जिंदा लाश बना दिया
बस, एक जिंदा लाश बना दिया
–अंकित सेंगर
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