
“अब उनसे महोब्बत फ़िर ना होगी”
था मेरा भी कोई अपना जिनसे मेरी सुबह शाम हसीन होती थी,
था मेरा भी कोई हमदर्द जिसके साथ मेरी यादें रंगीन होती थी।
पर अब जब वो मुझे छोड़कर कुछ इस तरह कहीं दूर चला गया था,
की अब इस बातों का मेरे लिए कोई मतलब भी नहीं हो रहा था।

दिमाग ने तो जैसे तैसे करके मुझे ख़ुद को संभाल लिया था,
पर बात तो थी मेरे दिल की उसे कमबक्त मैं संभाल ना पाया था।
रोते रोते उसकी यादों को दिल में दफनाने की कोशिश तो मैंने करी थी,
जब भी याद आती उसकी तो दिल फ़िर से तन्हा होकर भी हस लिया करता था।

रातों को उसकी याद सताती तो कोने में जाकर चुपचाप रो लिया करता था,
फ़िर उनसे वहीं बातें करने उनकी ही यादों में ख़ुद को छुपा लिया करता था।
रखकर नींद को दूर उनकी तस्वीर को रातों में गले लगा लिया करता था,
बस एक यही दिल को समझाने की कोशिश थी की अब प्यार दुबारा ना होना था।
~ Bhavesh Parmar

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